इतिहास लेखन: परंपरा, संस्कृति और गांव की पहचान को सहेजने का अनूठा प्रयास

इतिहास लेखन: परंपरा, संस्कृति और गांव की पहचान को सहेजने का अनूठा प्रयास
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) पेंड्रा तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जीपीएम के मार्गदर्शन में जिले में एक विशेष अभियान के तहत इतिहास लेखन का कार्य कराया गया। इस पहल में स्कूलों के बच्चों ने अपने शिक्षकों और गांव के जनप्रतिनिधियों व वरिष्ठ नागरिकों से संवाद स्थापित कर गांव के अतीत और वर्तमान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां संकलित कीं।
इस इतिहास लेखन अभियान के अंतर्गत बच्चों ने यह जाना कि उनके गांव का नाम किन परिस्थितियों और कारणों से पड़ा, गांव तक पहुँचने के मार्ग कैसे बने, गांव में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं कैसी हैं, कुल जनसंख्या कितनी है, महिला साक्षरता दर कितनी है और गांव की अन्य विशेषताएं क्या हैं।
विद्यालय स्तर पर तैयार इस इतिहास लेखन को संकुल स्तर पर संकलित किया गया। इसके पश्चात विकासखंड स्तर पर एकत्र कर जिला कार्यालय भेजा गया। जिला स्तर पर प्राथमिक से लेकर हायर सेकंडरी स्तर तक के सभी शासकीय स्कूलों के इतिहास लेखन को एकत्र कर किताब का रूप दिया गया।
15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिले के समस्त शासकीय विद्यालयों में इस पुस्तक का वाचन किया गया। वहीं जिला स्तरीय मुख्य समारोह में माननीय कलेक्टर श्रीमती कमलेश लीना मंडावी ने इतिहास लेखन पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया।
इस अवसर पर कलेक्टर ने बच्चों, शिक्षकों और जनसमुदाय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि —
“इतिहास लेखन केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और समाज की सामूहिक स्मृति को संजोने का प्रयास है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुमूल्य धरोहर सिद्ध होगा।”
शिक्षा विभाग ने भी इसे नवाचार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया और उम्मीद जताई कि इस पहल से बच्चों में इतिहास के प्रति रुचि बढ़ेगी, साथ ही स्थानीय जनजीवन की मौलिकता को सुरक्षित रखने का अवसर मिलेगा।





